बंदर और खरगोश की कहानी | Bandar aur Khargosh ki Kahani बंदरऔर खरगोश के कहानी बंदर और खरगोश की कहानी | Bandar aur Khargosh ki Kahani - एक जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे। उसी जंगल में एक बूढ़ा बंदर भी रहता था। बंदर अपनी होशियारी और चतुराई के लिए जाना जाता था। जंगल में जब किसी प्रकार की मुसीबत आती थी तो सभी जानवर अपनी समस्या का हल निकालने के लिए बंदर के पास ही जाते थे। उसी जंगल में एक बिल में एक खरगोश भी रहता था । एक बार खरगोश खाने की तलाश में कुछ दिनों के लिए बाहर चला गया जिससे उसका घर (बिल ) खाली हो गया । खरगोश का बिल खाली देखकर एक खरगोशनी उस बिल में रहने लगे। कई दिनों बाद जब खरगोश वापस आया तो उसने देखा कि उसके बिल में एक खरगोशनी रह रही है। अपने बिल में खरगोशनी को रहता देख खरगोश को बहुत गुस्सा आया और खरगोश ने खरगोशनी से अपना दिल खाली करने के लिए कहा किंतु खरगोशनीबोली - " मैं यहां कई दिनों से रह रही हूं और अब इस बिल पर मेरा अधिकार है। इस बिल को मैं किसी भी हालत में खाली नहीं करूंगी। " खरगोश और बन्दर की कहानी...
Aam ka पेड़ *एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।* *जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड़ के पास पहुंच जाता।* *पेड़ के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता।* *उस बच्चे और आम के पेड़ के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।* *बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड़ के पास आना कम कर दिया।* *कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।* *आम का पेड़ उस बालक को याद करके अकेला रोता।* *एक दिन अचानक पेड़ ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा,* *"तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।"* *बच्चे ने आम के पेड़ से कहा,* *"अब मेरी खेलने की उम्र नही है* *मुझे पढ़ना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"* *पेड़ ने कहा,* *"तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे,* *इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।"* *उस बच्चे ने आम के पेड़ से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया।* *उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया।* *आम का पेड़ उसकी राह देखता रहता।* *एक दिन वो फिर आया और कहने लगा,* *"अब म...
साभार उद्धृत - कहां राजा भोज- कहां गंगू तेली यह कहावत क्यों बनी ? बचपन से लेकर आज तक हजारों बार इस कहावत को सुना था कि "कहां राजा भोज- कहां गंगू तेली"। आमतौर पर यह ही पढ़ाया और बताया जाता था कि इस कहावत का अर्थ अमीर और गरीब के बीच तुलना करने के लिए है। पर भोपाल जाकर पता चला कि कहावत का दूर-दूर तक अमीरी- गरीबी से कोई संबंध नहीं है। और ना ही कोई गंगू तेली से संबंध है। आज तक तो सोचते थे कि किसी गंगू नाम के तेली की तुलना राजा भोज से की जा रही है। यह तो सिरे ही गलत है, बल्कि गंगू तेली नामक शख्स तो खुद राजा थे। जब इस बात का पता चला तो आश्चर्य की सीमा न रही साथ ही यह भी समझ आया यदि घुमक्कड़ी ध्यान से करो तो आपके ज्ञान में सिर्फ वृद्धि ही नहीं होती बल्कि आपको ऐसी बातें पता चलती है जिस तरफ किसी ने ध्यान ही नहीं दिया होता और यह सोचकर हंसी भी आती है यह कहावत हम सब उनके लिए सबक है जो आज तक इसका इस्तेमाल अमीरी गरीबी की तुलना के लिए करते आए हैं। इस कहावत का संबंध मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और उसके जिला धार से है। भोपाल का पुराना नाम भोजपाल हुआ करता था। भोजपाल, नाम धार के रा...
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